Maithili Thakur Victory: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों में एक नया चेहरा उभरा है- प्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने दरभंगा जिले के अलीनगर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर शानदार जीत हासिल की है। मात्र 25 वर्ष की उम्र में राजनीति के मैदान में उतरीं मैथिली ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 11,000 से अधिक वोटों के अंतर से पीछे छोड़ दिया, जो भाजपा के लिए इस सीट पर 2008 के बाद पहली ऐतिहासिक सफलता है।
अपनी सांस्कृतिक जड़ों और युवा अपील के दम पर यह जीत हासिल करने वाली मैथिली ने जीत के ठीक बाद एक विशेष साक्षात्कार में अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने बताया कि यह जीत न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि मिथिलांचल क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और युवा ऊर्जा का प्रतीक है। आगे की योजनाओं पर बोलते हुए उन्होंने अलीनगर के विकास पर फोकस करने की बात कही, जो स्थानीय लोगों के लिए नई उम्मीद जगाती है।
Maithili Thakur Victory: मैथिली ठाकुर की जीत
विवरण — जानकारी
निर्वाचन क्षेत्र- अलीनगर (दरभंगा जिला, बिहार)
राजनीतिक पार्टी- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा, एनडीए)
वोट मार्जिन- 11,000+ वोट (अंतिम गणनाः मैथिली ~ 80,000 वोट, प्रतिद्वंद्वी ~69,000)
उम्र- 25 वर्ष (जन्म: 25 जुलाई 2000)
पृष्ठभूमि लोक गायिका, सोशल मीडिया स्टार, राइजिंग स्टार (2017) फाइनलिस्ट
प्रमुख प्रतिद्वंद्वी- बिनोद मिश्रा (राष्ट्रीय जनता दल आरजेडी)
चुनावी मोड़- भाजपा की 2008 के बाद अलीनगर में पहली जीत; एनडीए की कुल लैंडस्लाइड

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जीत पर बोली मैथिलि ‘यह मेरी नहीं, क्षेत्र की जीत है’
मैथिली ठाकुर ने अपनी जीत को “अलीनगर की जनता का आशीर्वाद” बताते हुए भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि लोक संगीत के माध्यम से उन्होंने हमेशा मिथिला की संस्कृति को जीवंत रखा है, और अब विधायक बनकर इसे राजनीतिक मंच पर आगे बढ़ाएंगी। “यह जीत मेरे लिए व्यक्तिगत खुशी से कहीं ज्यादा है- यह उन युवाओं की ताकत है जो बदलाव चाहते हैं। मैंने गीतों से जोड़ने की कोशिश की, वोटों से जोड़ा,” उन्होंने जोर देकर कहा।
यह जीत न केवल भाजपा के लिए मील का पत्थर है, बल्कि बिहार की राजनीति में कल्चरल आइकॉन के प्रवेश का संकेत भी। मैथिली की सोशल मीडिया फैन फॉलोइंग (लाखों व्यूज वाले फोक सॉन्ग्स) ने पहली बार वोटरों, खासकर युवाओं को आकर्षित किया।
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भाजपा में टिकट मिलने का सफर
भाजपा से टिकट मिलने की प्रक्रिया को मैथिली ने “भाग्य का खेल” बताया। 2025 में पार्टी में शामिल होने से पहले वे अपनी म्यूजिकल जर्नी में व्यस्त थीं- मधुबनी के संगीतकार परिवार से ताल्लुक रखने वाली मैथिली ने पिता रमेश ठाकुर और भाइयों आयाची व ऋषभ के साथ त्रयी बनाकर देशभर में लोकप्रियता हासिल की थी।
टिकट मिलने पर उन्होंने कहा, “मैंने कभी सोचा नहीं था कि स्टेज से संसद (विधानसभा) का सफर इतना छोटा होगा। पार्टी ने मेरी सांस्कृतिक पहचान को देखा और अलीनगर जैसी सीट सौंपी, जहां मिथिला की धड़कन है।” यह फैसला भाजपा की युवा -केंद्रित रणनीति का हिस्सा था, जो महागठबंधन के खिलाफ प्रभावी साबित हुआ।
मैथिली ठाकुर 25 वर्ष की आयु में बनी विधायक | Maithili Thakur Biography in Hindi
चुनावी यात्राओं का अनुभव
चुनाव प्रचार के दौरान मैथिली ने अलीनगर के हर कोने को छुआ-गांवों में लोक गीत गाकर, घर-घर जाकर लोगों से जुड़कर। उन्होंने साझा किया कि यात्राओं में सबसे यादगार पल थे वे जब ग्रामीण महिलाओं ने उनके गानों पर नाचना शुरू कर दिया। “कैंपेनिंग कोई बोझ नहीं लगी, बल्कि उत्सव जैसी थी।

मैंने देखा कि लोग न सिर्फ वोट, बल्कि उम्मीद मांग रहे थे- शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए,” मैथिली ने बताया। इन यात्राओं ने उन्हें क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं- जैसे बाढ़ प्रभावित इलाकों का विकास और युवाओं के लिए रोजगार-से रूबरू कराया। भाजपा की एनडीए गठबंधन रणनीति के तहत ये प्रयास सफल रहे, जहां कुल 243 सीटों में एनडीए को 200+ मिलीं।

अलीनगर के लिए आगे की रणनीति

जीत के बाद मैथिली ने स्पष्ट रोडमैप पेश किया- अलीनगर को “सांस्कृतिक हब” बनाने का प्लान। उन्होंने कहा, “मेरा फोकस बुनियादी सुविधाओं पर होगाः स्कूलों का उन्नयन, स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार और बाढ़ नियंत्रण। लेकिन इसके साथ मिथिला की लोककला को बढ़ावा देकर पर्यटन को मजबूत करेंगी। युवाओं के लिए संगीत वर्कशॉप्स और जॉब ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करूंगी।” यह रणनीति न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बूस्ट देगी, बल्कि भाजपा की ‘सबका साथ, सबका विकास’ विजन को मजबूत करेगी। मैथिली ने जोर दिया कि वे विधायक बनकर “गीतों की तरह सबको जोड़ेंगी”।
मैथिली ठाकुरः एक नई राजनीतिक यात्रा
मैथिली ठाकुर की यह जीत बिहार की राजनीति में एक ताजा हवा का झोंका है। एक गायिका से विधायक बनने का यह सफर न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि युवाओं को राजनीति में आने का संदेश भी देता है। एनडीए की प्रचंड जीत के बीच अलीनगर का यह परिणाम मिथिलांचल के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोलता है। जैसा कि मैथिली ने कहा, “यह अंत नहीं, शुरुआत है-अलीनगर को नई ऊंचाइयों पर ले चलूंगी।”